Adani Power को सुप्रीम कोर्ट से ₹500 करोड़ की बड़ी राहत! जानिए 2026–2035 तक शेयर प्राइस टारगेट

Adani Power के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। भारत के Supreme Court of India ने मुंद्रा SEZ से डोमेस्टिक मार्केट में बेची गई बिजली पर लगाए गए कस्टम ड्यूटी मामले में Adani Power के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2010 से 2016 के बीच वसूली गई कस्टम ड्यूटी कानून के बिना अधिकार के लगाई गई थी। इस फैसले के तहत सरकार को वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कंपनी को लगभग ₹500 करोड़ तक की राशि रिफंड करनी होगी।

इस ऐतिहासिक निर्णय से Adani Power की कैश पोजीशन मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे कंपनी की बैलेंस शीट को सीधा फायदा मिलेगा।

साथ ही, आने वाले क्वार्टर्स में मुनाफे और फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर भी पॉजिटिव असर देखने को मिल सकता है। निवेशकों और बाजार की नजर अब इस रिफंड की टाइमलाइन और इसके वित्तीय प्रभाव पर टिकी रहेगी।

Adani Power की मौजूदा स्थिति और जेनरेशन कैपेसिटी

Adani Power इस समय भारत की प्रमुख निजी थर्मल पावर कंपनियों में शामिल है। कंपनी फिलहाल लगभग 18.15 GW (18,150 MW) की इंस्टॉल्ड पावर जेनरेशन कैपेसिटी ऑपरेट कर रही है, जो देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित थर्मल पावर प्लांट्स के माध्यम से बिजली सप्लाई करती है।

वर्ष 2025 के दौरान Adani Power ने अपनी क्षमता को 17,550 MW से बढ़ाकर 18,150 MW कर लिया। इस विस्तार में विदर्भा इंडस्ट्रीज़ पावर लिमिटेड के 2×300 MW थर्मल पावर प्लांट का अधिग्रहण भी शामिल रहा, जिससे कंपनी का ग्रोथ ट्रैक रिकॉर्ड और मजबूत हुआ है।

कंपनी के मैनेजमेंट ने लॉन्ग-टर्म विज़न के तहत FY32 तक कुल जेनरेशन कैपेसिटी को करीब 41.87 GW तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

इसके लिए Adani Power लगभग ₹2 लाख करोड़ रुपये के मेगा कैपेक्स प्लान पर काम कर रही है। यह आक्रामक विस्तार रणनीति आने वाले वर्षों में कंपनी की मार्केट पोजीशन, रेवेन्यू और पावर सेक्टर में हिस्सेदारी को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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ताज़ा शेयर प्राइस और वैल्यूएशन अपडेट

Adani Power के शेयर ने हाल के ट्रेडिंग सेशंस में स्थिर और मजबूत प्रदर्शन दिखाया है। 5 जनवरी 2026 को Adani Power का शेयर लगभग ₹146.20 के स्तर पर बंद हुआ।

दिन के दौरान यह स्टॉक ₹144.46 से ₹148.40 की रेंज में ट्रेड करता नजर आया, जो निवेशकों की लगातार रुचि को दर्शाता है।

मौजूदा शेयर प्राइस के आधार पर कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹4.7 से ₹4.8 लाख करोड़ के आसपास आंका जा रहा है। इसी के साथ Adani Power भारत के पावर सेक्टर की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनियों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराती है।

बीते कुछ वर्षों में कंपनी ने स्ट्रॉन्ग रेवेन्यू ग्रोथ, डेट रिडक्शन और रेगुलेटरी क्लैरिटी जैसे महत्वपूर्ण मोर्चों पर बेहतर प्रदर्शन किया है।

इन फैक्टर्स ने Adani Power के वैल्यूएशन मल्टीपल को सपोर्ट किया है और लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए स्टॉक को आकर्षक बनाए रखा है।

आगे चलकर कंपनी की ग्रोथ स्ट्रैटेजी और फाइनेंशियल डिसिप्लिन शेयर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

2026 से 2030 तक Adani Power का संभावित शेयर प्राइस ट्रेंड

कई फाइनेंशियल ब्लॉग्स और एनालिसिस वेबसाइट्स के अनुमानों के अनुसार, अगर Adani Power की कमाई मौजूदा ग्रोथ ट्रेंड के अनुरूप आगे बढ़ती रहती है और कैपेसिटी एक्सपेंशन प्रोजेक्ट्स तय समय पर पूरे होते हैं, तो 2026 तक शेयर में सीमित लेकिन स्थिर अपसाइड देखने को मिल सकती है।

कुछ अनऑफिशियल प्राइस टारगेट मॉडल्स 2026 से 2028 के बीच Adani Power के शेयर के लिए लगभग 10% से 18% सालाना कम्पाउंड रिटर्न (CAGR) की संभावना जताते हैं।

हालांकि, ये अनुमान पूरी तरह से मार्केट कंडीशन, रेगुलेटरी माहौल और सेक्टर रिस्क पर निर्भर करते हैं और समय के साथ इनमें बदलाव संभव है।

अगर कोयला कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव, पावर डिमांड में सुस्ती या किसी तरह का पॉलिसी रिस्क सामने आता है, तो ये प्रोजेक्शंस नीचे की ओर भी जा सकते हैं। इसलिए निवेशकों को इन आंकड़ों को फिक्स्ड टारगेट नहीं, बल्कि संभावित रेंज के रूप में ही देखना चाहिए।

2031 से 2035 के लिए लॉन्ग टर्म आउटलुक

लंबी अवधि यानी 2031 से 2035 के बीच Adani Power पर निवेशकों का नजरिया काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी अपने लगभग 42 GW कैपेसिटी टारगेट, ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स और डेट मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी को कितनी सफलतापूर्वक लागू कर पाती है।

यदि FY32 तक योजनानुसार पूरी क्षमता चालू हो जाती है और रेगुलेटरी वातावरण सपोर्टिव बना रहता है, तो कई थर्ड-पार्टी एनालिसिस मॉडल्स 2030 के बाद के दशक में मजबूत वैल्यू क्रिएशन की संभावना दिखाते हैं। हालांकि, इस फेज में प्राइस टारगेट की रेंज काफी वाइड मानी जाती है, जिससे अनिश्चितता बनी रहती है।

निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे ऐसे लॉन्ग टर्म प्राइस अनुमान को केवल इंडिकेशन के तौर पर लें। पावर टैरिफ पॉलिसी, पर्यावरण से जुड़े नियम, ब्याज दरों में बदलाव और ग्रुप-लेवल न्यूज़ फ्लो जैसे फैक्टर्स के चलते शेयर में तेज़ वोलैटिलिटी देखने को मिल सकती है। इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले रिस्क और टाइम हॉराइजन को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

Disclaimer: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। यहां दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है, हम इसकी पूर्णता या सटीकता की कोई गारंटी नहीं देते।

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